Anupras Alankar

Anupras Alankar Ki Paribhasha: अनुप्रास अलंकार क्या है?, प्रकार और उदाहरण सहित जानें

अनुप्रास अलंकार (Anupras Alankar) हिंदी व्याकरण और हिंदी साहित्य का एक महत्वपूर्ण शब्दालंकार है। यह कविता और गद्य दोनों में भाषा को मधुर, प्रभावशाली और आकर्षक बनाता है। विद्यालयी परीक्षाओं से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे CTET, UPTET, SSC, UPSC तथा अन्य परीक्षाओं में अनुप्रास अलंकार से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।

यदि आप जानना चाहते हैं कि अनुप्रास अलंकार क्या है, इसकी परिभाषा, भेद, पहचान और उदाहरण क्या हैं, तो यह लेख आपके लिए पूरी जानकारी सरल भाषा में प्रस्तुत करता है।

अनुप्रास अलंकार क्या है? – Anupras Alankar Kise Kahate Hain

जब किसी वाक्य, पद या काव्य पंक्ति में एक ही वर्ण (व्यंजन या ध्वनि) की बार-बार आवृत्ति होती है और उससे भाषा में मधुरता, लय तथा सौंदर्य उत्पन्न होता है, तब वहाँ अनुप्रास अलंकार (Anupras Alankar) होता है।

सरल शब्दों में कहें तो—

जहाँ एक ही वर्ण की पुनरावृत्ति से काव्य में सौंदर्य उत्पन्न हो, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।

Anupras Alankar Ki Paribhasha – अनुप्रास अलंकार की परिभाषा

परिभाषा:- जिस काव्य या वाक्य में किसी एक वर्ण की बार-बार पुनरावृत्ति होने से भाषा में मधुरता और सौंदर्य उत्पन्न हो, वहाँ अनुप्रास अलंकार (Anupras Alankar) होता है।

आसान शब्दों में

यदि किसी कविता में बार-बार एक ही ध्वनि सुनाई दे और वह पढ़ने या सुनने में सुंदर लगे, तो उसे अनुप्रास अलंकार कहा जाता है।

अनुप्रास अलंकार की पहचान कैसे करें? – Anupras Alankar Ki Pehchan Kaise Karen?

किसी भी वाक्य में अनुप्रास अलंकार (Anupras Alankar) पहचानने के लिए निम्न बातों पर ध्यान दें—

  • एक ही वर्ण या ध्वनि बार-बार आए।
  • पुनरावृत्ति से वाक्य में लय और मधुरता उत्पन्न हो।
  • केवल शब्दों की पुनरावृत्ति नहीं, बल्कि वर्ण की पुनरावृत्ति महत्वपूर्ण होती है।
  • ध्वनि की समानता स्पष्ट रूप से दिखाई दे।

याद रखने की ट्रिक

“जहाँ वर्ण बार-बार आए, वहाँ अनुप्रास मुस्कुराए।”

Anupras Alankar Ke Bhed – अनुप्रास अलंकार के भेद

हिंदी व्याकरण में अनुप्रास अलंकार (Anupras Alankar) के पाँच प्रमुख भेद बताए जाते हैं।

1. छेकानुप्रास

जब किसी वर्ण की केवल एक बार पुनरावृत्ति होती है, तब छेकानुप्रास होता है।

उदाहरण:

  • चंचल चितवन चुरा गई।
  • गगन गर्जन गूँज उठा।

2. वृत्त्यानुप्रास

जब एक ही वर्ण कई बार दोहराया जाता है और पूरी पंक्ति में उसकी ध्वनि सुनाई देती है, तब वृत्त्यानुप्रास होता है।

उदाहरण:

  • कल कल करती कल्याणी धारा।
  • मधुर मुस्कान मन मोह ले।

3. श्रुत्यानुप्रास

जब उच्चारण स्थान समान होने के कारण ध्वनियों में समानता आती है, तब श्रुत्यानुप्रास होता है।

उदाहरण:

  • तट पर टकराती तरंगें।

4. लाटानुप्रास

जब समान शब्दों की पुनरावृत्ति अलग-अलग अर्थों में होती है, तब लाटानुप्रास होता है।

उदाहरण:

  • राम ने राम का नाम लिया।

5. अन्त्यानुप्रास

जब प्रत्येक पंक्ति के अंत में समान ध्वनि या तुक आती है, तब अन्त्यानुप्रास होता है।

उदाहरण:

  • आया समय सुहाना है।
  • मन में नया तराना है।

अनुप्रास अलंकार के उदाहरण – Anupras Alankar Ke Udaharan

नीचे दिए गए उदाहरणों से अनुप्रास अलंकार (Anupras Alankar) को आसानी से समझा जा सकता है।

उदाहरणदोहराया गया वर्ण
कल कल करती नदी
चंचल चितवन चुरा गई
गगन गर्जन गूँज उठा
मधुर मुस्कान मन मोह ले
पवन पत्तों पर पड़ा
नभ में नीलिमा निखरी
सरस सरिता सरगम सुनाए
झर-झर झरता झरना
धीर धीरे धारा बही
बाग में बहती बयार

अनुप्रास अलंकार और यमक अलंकार में अंतर

अनुप्रास अलंकारयमक अलंकार
वर्ण की पुनरावृत्ति होती है।शब्द की पुनरावृत्ति होती है।
ध्वनि-सौंदर्य मुख्य होता है।एक ही शब्द के अलग-अलग अर्थ होते हैं।
भाषा में मधुरता आती है।अर्थ में चमत्कार उत्पन्न होता है।

अनुप्रास अलंकार और श्लेष अलंकार में अंतर

अनुप्रासश्लेष
वर्ण की पुनरावृत्ति होती है।एक शब्द से अनेक अर्थ निकलते हैं।
ध्वनि पर आधारित होता है।अर्थ पर आधारित होता है।
मधुरता बढ़ती है।चमत्कारपूर्ण अर्थ उत्पन्न होता है।

अनुप्रास अलंकार का महत्व

अनुप्रास अलंकार केवल भाषा को सुंदर नहीं बनाता, बल्कि कविता को यादगार भी बनाता है।

इसके प्रमुख लाभ हैं—

  • भाषा में मधुरता आती है।
  • कविता अधिक आकर्षक बनती है।
  • पढ़ने और सुनने में आनंद मिलता है।
  • काव्य का प्रभाव बढ़ता है।
  • लय और संगीतात्मकता उत्पन्न होती है।
  • भावों की अभिव्यक्ति प्रभावशाली बनती है।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

यदि आप बोर्ड या प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो इन बातों को अवश्य याद रखें—

  • अनुप्रास अलंकार शब्दालंकार का एक प्रमुख प्रकार है।
  • इसमें वर्णों की पुनरावृत्ति होती है।
  • भाषा की मधुरता बढ़ती है।
  • पाँच प्रमुख भेद याद रखें।
  • उदाहरणों का अभ्यास अवश्य करें।

अनुप्रास अलंकार याद रखने की आसान ट्रिक

ट्रिक:

“जहाँ वर्णों की बार-बार आवृत्ति दिखाई दे, वहाँ अनुप्रास अलंकार समझिए।”

यह ट्रिक परीक्षा में प्रश्न हल करने में काफी मदद करती है।

अक्सर पूछे जानें वाले सवाल

1. अनुप्रास अलंकार क्या है?

जिस वाक्य या काव्य में एक ही वर्ण की बार-बार पुनरावृत्ति से भाषा में सौंदर्य उत्पन्न हो, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।

2. अनुप्रास अलंकार की परिभाषा क्या है?

एक ही वर्ण की पुनरावृत्ति से काव्य में मधुरता और सौंदर्य उत्पन्न होने को अनुप्रास अलंकार कहते हैं।

3. अनुप्रास अलंकार के कितने भेद होते हैं?

अनुप्रास अलंकार के पाँच प्रमुख भेद माने जाते हैं—
छेकानुप्रास
वृत्त्यानुप्रास
श्रुत्यानुप्रास
लाटानुप्रास
अन्त्यानुप्रास

4. अनुप्रास अलंकार की पहचान कैसे करें?

यदि किसी वाक्य में एक ही वर्ण बार-बार आए और उससे ध्वनि-सौंदर्य उत्पन्न हो, तो वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।

5. अनुप्रास अलंकार का सबसे सरल उदाहरण क्या है?

कल कल करती नदी।
यहाँ “क” वर्ण की बार-बार पुनरावृत्ति होने के कारण अनुप्रास अलंकार है।

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